Speech of Sh. Modi Ji in BJP National Council Meeting.

नरेन्द्र मोदी जी का भाषण

भारत माता की जय। श्रद्धेय आडवाणी जी, हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री राजनाथ सिंह जी, लोक सभा में प्रतिपक्ष नेता आदरणीय सुषमा जी, श्री अरुण जेटली जी, श्री वैंकैया जी, भारतीय जनता पार्टी को गौरव दिलाने वाले मुख्यमंत्री श्रीमान शिवराज जी, श्रीमान रमन सिंह जी, बहन वसुंधरा जी, मंच पर विराजमान पार्टी के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी और देश के कोने-कोने से आए हुए भारतीय जनता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता भाईयों और बहनों दो दिन से हम विस्तार से देश की चिंता और चर्चा कर रहे हैं। राजनीति की चिंता और चर्चा कर रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी के संगठन के कार्यक्रमों के बारे में भी सोच रहे हैं। देश आजाद होने के बाद चुनाव बहुत आए। प्रारंभ से जनसंघ के जमाने से भारतीय जनता पार्टी के जमाने से हम सबको चुनाव के मैदान में कार्य करने का अनुभव है। लेकिन भूतकाल के उन सभी चुनावों को देखें तो ये 2014 के चुनाव हर प्रकार से भिन्न हैं। इसके पूर्व देश की ऐसी दुर्दशा कभी नहीं देखी। विश्व का इतना बड़ा लोकतांत्रिक देश नेता विहीन हो, नीति विहीन हो और नियत भी शक के घेरे में हो। ऐसे दिवस कभी इस देश ने देखे नहीं थे। जो आज हम भुगत रहे हैं। भ्रष्टाचार का इतना विकराल रूप इस दशक में जो देखा है देश ने कभी नहीं देखा। आत्महत्या करता किसान। रोजगार के लिए भटकता नौजवान, इज्जत बचाने के लिए परेशान मां और बहनों महंगाई की मार से तड़पता भुखा बच्चा। भाइयों-बहनों ऐसी दुर्दशा कभी नहीं देखी। और इसलिए ये 2014 का चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का चुनाव नहीं है। ये 2014 का चुनाव भारत के कोटि-कोटि जनों के लिए एक आशा और अरमान का चुनाव है। 2014 का चुनाव 21 सदी के प्रारंभ में अटलजी-आडवाणी जी ने देश को जिस ऊंचाई पर ले जाकर रखा था। उससे और ऊंचाईयों पर देश को पहुंचाने का देशवासियों के सपनों का चुनाव है। और इसलिए भाइयों-बहनों दिल्ली की धरती पर दो प्रमुख राष्ट्रीय दलों की राष्ट्रीय परिषदें हुईं। और अगर उसका विश्लेषण करें तो साफ नजर आता है। कि दो दिन पूर्व जो कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था उसमें 2014 के चुनाव को दल को बचाने की जद्दाजे हद के रूप में दिखाई पड़ता है। उनका दल कैसे बचे, कांग्रेस को कैसे बचाएं, बिखरती हुई पार्टी को कैसे एक रखें ये उनकी जद्दाजे हद का विषय था। भाइयों-बहनों वहां पर दल बचाने की कोशिश हो रही थी। यहां पर देश बचाने की जद्दोजहद। ये 2014 के चुनाव का मूलतः फर्क है। भाइयों-बहनों देश के कांग्रेस के कार्यकर्ता बड़ी आशा के साथ दिल्ली आए थे उनको बताया गया था कि 17 तारीख को प्रधानमंत्री पद के लिए घोषणा की जाएगी। बड़ी आशा और उमंग के साथ। वो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की सौगात लेकर के जाने के लिए लालायित थे और जैसे हमारे अरुण जेटली जी ने कहा – देशभर के कांग्रेस कार्यकर्ता आए थे तो प्रधानमंत्री लेने के लिए लेकिन वापिस गए गैस के दिन सिलेण्डर लेकर। गैस के तीन सिलेण्डर लेकर वापस गए।

भाईयों-बहनों वहां पर जो बातें हुई हैं। कुछ बातों का जिक्र करना मुझे जरूरी लगता है। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा न करने के पीछे लोकतांत्रिक परम्पराओं का उदाहरण दिया गया। क्या यह सच्चाई है? मैं आशा करता था कि देश में दिन-रात इन विषयों की चर्चा करने वाले लागे इन मुद्दों पर जरूर चर्चा करते लेकिन चार दिन बीत गए चर्चा नहीं हो रही है। हर एक के अपने-अपने कारण होंगे लेकिन देश जानना चाहता है। देश आजाद होने के बाद जब पहले प्रधानमंत्री पसंद किए गए तब लोकतांत्रिक परंपराओं का त्याग हुआ था। पूरी कांग्रेस पार्टी एक स्वर से सरदार वलभभाई पटले को प्रधानमंत्री बनाना चाहती थी। वो कौन सी लोकतांत्रिक परम्परा थी, कांग्रेस के हर व्यक्ति की इच्छा के बावजुद भी सरदार वलभभाई पटले को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया गया। आप परम्परा की बात करते हैं। मैं जानना चाहता हूं कि 31 अक्तूबर 1984 श्रीमती इंदिरा गांधी जी की हत्या हुई। राजीव गांधी कलकत्ता में थे। वो कलकत्ता से दौड़ते हुए आए। अस्पताल गए और कुछ ही पलों में राजीव गांधी जी का प्रधानमंत्री पद का शपथ ग्रहण समाराहे हुआ। मैं कांग्रेस पार्टी जो परम्पराओं की चर्चा करती हैं मैं उससे पछूना चाहता हूं कि आप 1984 के उस समय क्या कोई पार्लियामेंट्री की मीटिंग हुई थी। क्या कांग्रेस के पार्लियामेंट्री पार्टी ने अपने प्रधानमंत्री पद के व्यक्ति को चुना था उसके कोई नाटे हैं मिनट्स हैं, व्यवस्था है, कुछ नहीं। दो-चार लोग मिलकर के हड़बड़ी में तुरंत उनका शपथ करवा दिया गया था। और आप हमें परम्परा की सीख देते हो इससे भी आगे 2004 यूपीए का चुना हुआ। यूपीए की सरकार बननी थी। भाईयों- बहनों मैं दावे से कहता हूं – यूपीए-1 में किसी पार्लियामेंट्री पार्टी ने डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना नहीं था। नेता के रूप में नहीं चुना था। कांग्रेस की पार्लियामेंट्री पार्टी ने मैडम सोनिया गांधी को नेता के रूप में चुना था। लेकिन बाद में मैडम सोनिया जी ने डॉ. मनमोहन सिंह जी को नॉमिनेट किया और उनका प्रधानमंत्री पद का शपथ दिलवाया गया था। पार्लियामेंट्री पार्टी की बातें ऐसी बातें करके आप बच नहीं सकते और बहन सुषमा जी ने भी कहा, राजनाथ जी ने भी कहा, वैंकैया जी ने भी कहा कल अरुण जी ने भी कहा था चुनाव से भागने के कई कारण हो सकते हैं। सबने अपने-अपने तरीके से कहा है। लेकिन मुझे एक मानवीय कारण नजर आता है। राजनीतिक कारण तो है ही लेकिन एक मानवीय कारण भी नजर आ रहा है। वो मानवीय कारण है जब पराजय बिल्कुल निश्चित दिख रहा है। विनाश सामने नजर आ रहा है। तो क्या कोई मां अपने बेटे को बलि चढ़ाने के लिए तैयार होती है क्या-कौन मां अपने बेटे को बलि चढ़ाएगी राजनीति के नाम पर। और इसलिए एक मां का मन आखिर कर यही निर्णय कर गया नहीं, मेरे बेटे को बचाओ। भाइयों-बहनों इन दिनों चायवाले की बड़ी खातिरदारी हो रही है। देश का हर चायवाला सीना तान के घुम रहा है। भाइयों-बहनों इनका चुनाव से भाग जाने का कारण दो और भी है। एक, जिस परम्परा में वो पले-बढे़ हैं जिस प्रकार से एक वरिष्ठ परिवार के रूप में अपने आपको प्रतिष्ठित किया है।

भाइयों-बहनों जब इस प्रकार के जीवन के लागे जीते हैं न तो उनके मन की रचना भी ऐसी ही हो जाती है। सामंतशाही मानसिकता घर कर लेती है। और तब उनको विचार आता है। लोक सभा का चुनाव महत्वपूर्ण है। कांग्रेस का जीतना भी चाहिए। लेकिन ये तो बेईज्जती का सवाल है कि एक चायवाले से भीड़न। बड़ी शर्मिदं गी महससू हो रही है। कोई बराबरी नहीं है। भाइयों-बहनों वे नामदार हैं और मैं कामदार हूं, ऐसे बड़े नामदार एक कामदार से मुकाबला करना बुरा मानते हैं। अपना खुद का अपमान मानते हैं। वो कैसे लड़ सकते हैं इतना ही नहीं भाइयों कभी-कभी परम्परागत ऊंच-नीच का भाव, जातिवाद का जहर, मनामे न पले हुए उच्चता का भाव। उच्च कुल में पैदा हुए लोगों के लिए ये भी चिंता का विषय है कि हम इतने बडे़ कुल में पैदा हुए हैं जिस कुल-परम्परा की सदियों से इज्जत हुआ करती थी। और सामने एक पिछडी़ जाति में पैदा हुआ एक ऐसा व्यक्ति जिसकी मां अड़ोस-पड़ोस में पानी भरकर, बर्तन साफ करती थी। एक ऐसा व्यक्ति जो रले के डिब्बे में चाय बचे ता था। ऐसी पिछड़ी जाती में पैदा हुए ऐसे व्यक्ति के खिलाफ मैं लड़ूं।

भाइयों-बहनों राजनीति की परिधि के बाहर भी ये भी सारे कारण हैं और इसलिए भाइयों-बहनों 2014 का चुनाव जब हम देख रहे हैं तब जरा कल्पना कीजिए भाइयों-बहनों हम जब गांव-गांव, गली-गली के लोगों से मिलते हैं पूछते हैं। और भाइयों-बहनों 27 अक्तूबर को बम धमाकों के बीच भारत मां की अपने से निर्दोष लागे पूजा-अर्चना करते थे। भाइयों-बहनों उस समय जो जन सैलाब डटा हुआ था। वो दृश्य मुझे इस बात का संकेत करता है कि जब देश आजादी की लड़ाई लड़ता था। वौ कौन सी प्रेरणा थी कि भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू फांसी के फंदे पर झूल जाने के लिए लालायित हुआ करते थे। जो आज आजादी के लिए उस समय थी जो तर्पण आजादी को पाने के लिए उस समय की आजादी को पाने के लिए अपनी जवानी खपा देते थ। भाइयों-बहनों आजादी के इतने समय के बाद ये 2014 का चुनाव उस तड़प़ न को ले करके आया है। उस समय आजादी के लिए लोगों को मरने का मौका मिला, अब स्वराज्य के लिए जीवन दिया। नई पीढ़ी स्वराज्य के लिए जीवन देने के लिए तडप़ रही है। देश के नौजवानों को लग रहा है कि आजादी के जगं में मरने का सौभाग्य तो नहीं मिला लेिकन आज आजाद हिन्दुस्तान में स्वराज्य के लिए जीने का अवसर मिला है। इस चुनाव की प्रेरणा यह भावना है भाइयों-बहनों वो विजय इस चुनाव में दिखाई दे रहा है। और तभी तो जिनका भारतीय जनता पार्टी से कोसों दूर सम्बन्ध नहीं है। जिसका भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के नाते अवसर नहीं मिला है। जो राजनीति से भी अछूता है। ऐसे लाखों लागे आज भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय पहुंचते हैं। मुझे चिट्ठियां लिखते हैं। फेसबुक पर लिखते हैं। हमें काम दीजिए हम कुछ करना चाहते हैं। यह ललक 2014 के चुनाव में ये ललक आजादी के समय में जो ललक थी स्वराज्य के आंदोलन में जो भावना थी। स्वराज्य के आंदोलन की भावना 2014 के चुनाव में प्रगट हो रही है।

भाइयों-बहनों देश के आजादी के 60 साल से भी अधिक समय बीत गए। गरीबों की चिंता की बात बहुत सुनी। विकास की बातें बहुत सुनी हैं। जरा पल भर के लिए भारत-मां के मानचित्र को जरा अपनी नजर के समक्ष रखें भाइयों-बहनों पल भर के लिए देश के मानचित्र को अपने सामने रखें। हमारी नीतियों में क्या कमी थी? हमारे कार्यों में कौन सी खाटे रह गई कि जिसके कारण जो भारत मां का चित्र देखते हैं तो भारत माता का पश्चिमी हिस्सा तो कुछ कर रहा है ऐसा नजर आ रहा है। कुछ हो रहा है ऐसा नजर आ रहा है। विकास के धीरे से कदम क्यों न हो नजर आ रहे है। लेकिन क्या कारण हैं कि मेरी भारत मां का अगर मध्य से देखें पूरा पूर्वी हिस्सा विकास के लिए तड़प़ रहा है एसी स्थिति क्यों आई, यह असंतुलन पैदा क्यों हुआ। भाइयों बहनों मैं आज देशवासियों से यहां से यह विश्वास देना चाहता हूं, भारतीय जनता पार्टी को 2014 में जब आप मई महीने में देश की सेवा करने का अवसर देंगे, हमारी यह पहली गारंटी रहेगी कि भारत वह इलाका जो अभी विकास की यात्रा में अभी बहुत पीछे है हम उसे सबसे पहले आगे बढा़ ना चाहते हैं। पश्चिमी की बराबरी तक तो लाएं। ऐसी कैसी मेरी भारत मां हो कि जिसकी एक भुजा तो मजबूत हो और दूसरी भुजा बहुत दुर्बल हो। ऐसी मेरी भारत माता नहीं हो सकती। और इसलिए हमारी यह सोच है। चाहे बिहार हो, बंगाल हो, झारखडं हो, असम हो, नोर्थ-ईस्ट हो, उड़ीसा हो पूरा पूर्वी इलाका उत्तर प्रदेश का पूरा पूर्वी हिस्सा भाईयों बहनों हम संतुलित विकास के स्वप्न को लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं। भाईयों-बहनों अगर हमें देश को मजबूत बनाना है। तो रिजनल एसपेरेशन जो है उसे संकट नहीं समझना चाहिए। पिछले दशकों में राजनेताओं ने रिजनल एसपेरेशनल को जैसे दिल्ली पर बहुत बड़ा बाझे आ गया ऐसे ही उसको देखा है। भाईयों बहनों रिजनल एसपेरेशनल विकास के लिए बहुत बड़ा अवसर भी बन सकते हैं। वो चुनौती नहीं हैं वो अवसर हैं क्योंकि हर राज्य के आगे बढ़ऩे की जो ललक जगी हैं अगर दिल्ली और वो जुड़ जाए तो कितनी तेज गति से आगे बढ़ सकते हैं ऐसा मेरा पूरा भरोसा हैं। भाईयों-बहनों हमारा देश एक संघीय ढांचा है। और ये संविधान की धाराओं तक सीमित नहीं हो सकता। ये संघीय ढांचा लेटर एंड सिप्रिट के रूप में हमने इसको इज्जत करनी होगी, गौरव करना होगा और भाईयों बहनों मेरे लिए यह बड़े आनन्द का विषय है कि मैं मुख्यमंत्री पद पर रहा हूं अब पार्टी ने मुझे नए दायित्व के लिए पसंद किया है। लेकिन एक मुख्यमंत्री के नाते संघीय ढाचंे का महत्व क्या होता है मैं भलिभांति अनुभव करता हूं। दिल्ली में अनुकूल सरकार थी अटलजी की तब संघीय ढांचे के हिस्से के नाते एक राज्य के मुख्यमंत्री के नाते किया हुआ काम और विपरीत दिल्ली के माहौल में किया हुआ काम दोनों को मैंने अनुभव किया है। और खुद अनुभव किया होने के कारण मैं हर राज्य की पीड़ा को भलिभांति समझ सकता हूं। हर मुख्यमंत्री की पीड़ा को समझ सकता हूं, संघीय ढांचे के महात्म्य को समझ सकता हूं और इसलिए भाईयों-बहनों भारतीय जनता पार्टी की सरकार संघीय ढांचे को सशक्त बनाने के लिए। संघीय ढांचे को एम्पावर करने में रूचि रखती है। हम उसको आगे बढ़ाना चाहते हैं।

भाईयों-बहनों आज एटिड्यूड ऐसा है- एक बिग ब्रदर वाली एटिट्यूड है। हम दिल्ली वाले हैं हम राज्यों को कुछ देते हैं। ये शोभा नहीं देता। हम स्थिति को बदलने का वादा करते हैं। कोई छोटा भाई नहीं है। कोई बड़ा भाई नहीं है। दोनों भाई कंधे से कंधा मिलाकर बराबर की शक्ति से ये भारत मां को आगे ले जा रहे हैं। ये भाव बनाना चाहिए। आज माना ये जाता है कि प्रधानमंत्री और उनका मंत्रीपरिषद ये टीम देश को आगे बढा़ एगी। मेरी सोच भिन्न है। मैं चाहता हूं कि प्रधानमंत्री और सारे मुख्यमंत्री ये मिलाकर एक टीम हो जो देश को आगे चलाए। इतना ही नहीं केन्द्र का मंत्रीपरिषद और राज्यों का मंत्रीपरिषद ये सब मिलकर के एक बृहत टीम बने और केन्द्र की ब्यूरोक्रेसी, राज्य की ब्यूरोक्रेसी ये सब मिलाकर के एक विशाल टीम के रूप में करें अगर ये माहौल हम बनाएंगे, तो आज जिन समस्याओं से हम जूझ रहे हैं उन समस्याओं से हम अपने देश को शक्तियों के भरोसे शक्तियों को जोड़कर के हम देश को आगे बढा़ सकते हैं। भाईयों बहनों देश के लिए सुशासन यह बहुत अनिवार्य है। देश की समस्याओं की जड़ों में बैड गवर्नेंस हैं कुशासन है। उससे निकलना है तो हमें गुड गवर्नेंस पर बल देना पड़ेगा। और भाईयों-बहनों ये गुड गवर्नेंस ये कोई अमीरों के लिए नहीं होता है। अमीर तो सरकारें खरीद सकते हैं। गुड गवर्नेंस गरीब के लिए होता है। सामान्य-वंचितों के लिए होता है। दलित के लिए होता है। पीडि़त के लिए होता है। शोषित के लिए होता है। अगर सुशासन है तो सरकारें अच्छी चलेगी। गरीब के बच्चे की पढा़ई भी अच्छी होगी। सुशासन अच्छा नहीं होगा तो गरीब का बच्चा बेचारा वहीं रह जाएगा और इसलिए सुशासन चाहिए। भाईयों-बहनों हम गुड गवनेंस को लेकर के आगे बढ़ना चाहते हैं तब इन दिनों बड़ी बातें हम सुनते हैं भाईयों-बहनों हम तय करें भाईयों-बहनों हम कई दिनों से बातें सुन रहे हैं। हमें तय करना है कि अब हमें घिसी-पिटी टेप रिकॉर्डर की आवाज पर भरोसा करना है कि ट्रेक रिकॉर्ड पर भरोसा करना है। टेप रिकॉर्डर की घिसी-पिटी आवाज बहुत सुन चुके हैं देश ट्रेक रिकॉर्ड पर निर्णय करे कि देश को किसके भरोसे किसके हाथ में सलामती के साथ देना है उस पर निर्णय करें। भाईयों बहनों सिर्फ बिल नहीं चाहिए। पॉलिटिकल विल चाहिए। और करने के लिए दिल चाहिए। भाईयों बहनों एक्ट, एक्ट, एक्ट बहुत सुन चुके हैं। देश ने एक्ट बहुत सुन लिया अब देश को एक्शन चाहिए। भाईयों-बहनों चुनाव जीतने के लिए डाले फिर भी सरकार डाले रही है। भाईयों बहनों डाले अपनी जगह पर है। लेिकन लगकर विकास के लिए डिवेलपमेंट चाहिए। डिलीवरी चाहिए। और इसलिए गुड गवर्नेंस डोल से भी आगे बढ़कर के डेवल्पमेंट और डिलीवरी के लिए उन राले को हमें स्वीकार करना होगा और आगे बढ़ाना होगा।

भाईयों-बहनों पिछले दस साल में शायद ही कोई दिन ऐसा गया होगा कि प्रधानमंत्री जी ने कोई कमिटी न बनाई हो हर समस्या के लिए कमेटी, हर समस्या के लिए एक कमिटी। मेरे देशवासियों देश कमिटीयों के बोझ से दब रहा है। हमें कमिटी नहीं कमीटमेंट चाहिए। और देश के लिए कमिटमेंट चाहिए। भाईयों बहनों इतना बडा़ विशाल देश हमारा जब मैं भारत माता की तरह देखता हूं उसके बाद जीवन की तरह देखता हंू तो मुझे इस भारत की पूरी – जब हम सुनते हैं न कि कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी वो कौन सी बात है। कुछ बात हे कि हस्ती मिटती नहीं हमारी वो कौन सी बात है, भाईयों-बहनों इन्द्रधनुष के सात रंग होते हैं। वही इन्द्रधनुष के सात रंग और उन सात रंगों की व्याख्या करें तो हमारी भारत मां को सदियों से वो चमकाते आए हैं। इंद्रधनुष का पहला रंग है भारत की संस्कृति की महान विरासत हमारी कुटुम्ब प्रथा। परिवार व्यवस्था। हजारों साल से इस व्यवस्था ने हमें बनाया है, बचाया है, बढ़ाया है। उस परिवार व्यवस्था को हम कैसे अधिक से अधिक सशक्त बनाएं। हमारी नीतियां, हमारी योजना भारत की इस महान व्यवस्था परिवार उसका सशक्तिकरण कैसे करें। दूसरा रंग है इन्द्रधनुष का। हमारी कृषि, हमारे पशु, हमारा गांव, महात्मा गांधी भारत को गांवों का देश कहते थे। ये हमारे इन्द्रधनुष का एक बहुत बडा़ महत्वपूर्ण चमकीला अंग है। अगर हम अगर इसे और चमकदार नहीं बनाते कृषि हो, पशुपालन हो, हमारा गांव हो, गरीब हो और इसलिए नियत उनकी भलाई के लिए नीतियां बनाने की होनी चाहिए। भाईयों बहनों हम जिस बात के लिए गर्व कर सकते हैं वो हमारी तीसरा रगं है इन्द्रधनुष का वो हमारी भारत की नारी है। हमारी मातृशक्ति त्याग और तपस्या की मूर्ति आज हमने वहां कहा लाकर के छोड़ा है। इन्द्रधनुष के रंगों को आकर्षक इन्द्रधनुष को बनाना है तो हमारी माताओं का इम्पावरमेंट होना चाहिए। उनकी शिक्षा-दीक्षा इस पर हमारा बल होना चाहिए। आर्थिक सामर्थ्य की धरोहर उसके पास हो उस पर हमें बल देना चाहिए। उसकी सुरक्षा पर हमें बल देना चाहिए। हमारे इन्द्रधनुष का चौथा रंग है जल, जमीन, जंगल, जलवायु ये हमारी विरासत है हमारी अमानत है। अगर हमें भारत को आने वाले सदियों तक विकास की दौड़़ में आगे रखना है तो हमारे इन्द्रधनुष के चौथे रंग को भी उसकी परवरिश करनी होगी। उसको सुरक्षित करना होगा। उसको आधुनिक टैक्नोलॉजी के साथ और अधिक बलवत् बनाना पड़ेगा। भाईयों बहनों इसका पांचवा रगं है जो आज सबसे महत्वपूर्ण है। वह है हमारा युवा धन। हमारी युवा शक्ति। हम कितने भाग्यवान हैं। कि आज हिन्दुस्तान दुनिया का सबसे नौजवान देश है। 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 से कम आयु की है। 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 से कम आयु की है तो भाईयों-बहनों जिस देश के पास इतना बडा़ डेमोग्राफिक डिविजन हो इतनी हमारे पास नौजवानों की शक्ति हो हम दुनिया को क्या कुछ नहीं दे सकते हैं। पूरे विश्व को वर्क फोर्स के लिए आने वाले दिनों में गम्भीर संकट आने वाला है। अगर आज हमने तैयारियां कर ली होती तो दुनिया के वर्क फोर्स के लिए आज हमारे भारत का नौजवान न केवल भारत का निर्माण करता बल्कि विश्व का निर्माण करने की ताकत रखता उसके लिए हमें चिंता करनी चाहिए। भाईयों बहनों हमारे देश का युवा कुछ बात तो बडी़ चिंता फैला रही है। आधुनिकता के नाम पर पश्चिमी रंग के प्रभाव के कारण इन्द्रधनुष का ये रंग कहीं फिका तो नहीं पड़़ रहा है। जब यह खबरें आती हैं – ड्रग्स, नारकोटिक्स कुछ इलाकों में हमारी युवापीढ़ी को तबाह कर रहा है। भाईयों बहनों राजनीति से परे उठकर के हम सबका दायित्व बनता है कि सारे देश वासियों का दायित्व बनता है कि अपने इन नौजवानों को ड्रग्स, नारकोटिक्स में कदम रखने से पहले बचा लें। जीरो टालरेंस का माहौल बनाएं हम। हमारी इस युवा पीढी़ की रक्षा करनी पड़ेगी हमें कानूनी व्यवस्था से हो। विदेशों से स्मगलिंग अगर होता है तो उसको रोकने की बात हो। हमें एक दायित्व को निभाना होगा। हमारे युवा धन की रक्षा करके उसी युवा धन की ताकत के भरोसे इस भारत को विश्वगुरू बनाने का सपना साकार करना होगा। भाईयों बहनों इन्द्रधनुष का सातवा रंग है वो भी हमारी बडी़ अनमोल विरासत है और वो है डेमोक्रेसी हमारा लोकतंत्र और जिस देश के पास डेमोग्राफिक डिवीजन हो डेमोक्रेटिक डिवीजन हो वो देश दुनिया के सामने कितनी बड़ी ताकत के साथ आगे बढ़ सकता है और इसलिए भाईयों हमारा लोकतंत्र ये हमारी सबसे बडी़ खुबी है। विश्व के सामने आंख में आंख डालकर बताने की ताकत ये हमारा लोकतंत्र देश बना है। भाईयों-बहनों समयरहते हमने हमारे इस लोकतंत्र के रंग को और अधिक कैसे ताकतवर बनाना उस पर हमें सोचना होगा। भाईयों बहनों हमने हमारे लोकतंत्र को रिप्रजेंटेटिव सिस्टम से आगे लेकर के पार्टिसिपेटरी डेमोक्रेसी सिस्टम पर बल देने की बात है। प्रतिनिधि वाला लोकतंत्र उसको जनभागीदारी वाले लोकतंत्र में ले जाना है। भाईयों-बहनों हमें गर्व है हम गणतंत्र के परम्परा को निभाते हैं लेकिन समय की मांग है कि अब सामान्य मानवीय गणतंत्र में गुण तंत्र की भी अनुभूति करें। वह एसेंस कैसे भर दिया जाए अपने आचरण के द्वारा, अपने व्यवहार के द्वारालोकतांत्रिक परम्पराओं के प्रति गौरव करके हम उसको कैसे करें और इस इन्द्रधनुष का सातवां रंग है और जो अत्यंत महत्वपूर्ण है और वह है ज्ञान भारत जब-जब ज्ञान युग में रही है। भारत ने डंका बजाया है। हम ज्ञान के उपासक हैं। हर मां अपने बेटे को आशीर्वाद देती है तो क्या देती है कहती है बेटा पढ़ लिखकर के बड़ा होना। हर मां के मुंह से यह निकलता है। ये ज्ञान हमारे इस इन्द्रधनुष के सात रगं का महत्वपूर्ण रंग है उस ज्ञान को हम किस प्रकार से अधिक शक्तिशाली बनाएं उसकी ओर हमें जाना है। भाईयों-बहनों इन सातों रंग की कीर्ति कैसे बढे़ नई कल्पना कैसे जुड़े। नए विचार कैसे उसके साथ आएं। उसको लेकर के हम आगे बढ़ना चाहते हैं। भाईयों-बहनों अभी कांग्रेस के अधिवेशन में कहा गया कि कांग्रेस पार्टी एक सोच है। हम भी मानते हैं। बिना सोच के न कोई दल हो सकता है। न कोई आंदोलन हो सकता है। लेकिन कठिनाई ये है कि आज कांग्रेस के पास सोच है कि नहीं है कैसी सोच है, कौन सी सोच हे वो तो एक बात है। लेकिन देश इतना जरूर जानता है कि पूरी कांग्रेस पार्टी सोच में पड़ी हुई है लेकिन भाईयों बहनों आज मैं आपके सामने कहना चाहता हूं इस सोच को समझने की आवश्यकता है। मैं कहना चाहता हूं आपकी सोच क्या है। हमारी सोच क्या है। अब ये देशवासी आज मुझे टीवी के माध्यम से देख रहे हैं, मैं उनसे भी अनुरोध करता हूं मेरे भाईयों बहनों कि आप मेरे शब्दों पर गौर कीजिए। उनकी सोच है भारत मधुमक्खी का छत्ता है। ये कहा था उन्होंने हनी भी है। उनकी सोच है भारत मधुमक्खी का छत्ता है। हमारी सोच है भारत हमारी माता है। उनकी सोच है। गरीबी ये मन की अवस्था है। हमारी सोच है गरीब हमारे लिए दरिद्र-नारायण हैं। उनकी सोच है। जब तक हम गरीब की बात नहीं करते मजा नहीं आता। ये मैं उनके शब्दों को बता रहा हूं, इसमें एक शब्द भी मेरा नहीं है। वे कहते हैं – हम जब तक गरीब की बात नहीं करें मजा नहीं आता। और हम जब गरीब की बात को सुने उसको याद करें तो दर्द सेहम रात भर सो नहीं पाते। उन्हें मजा नहीं आता। हमें नींद  नहीं आती। ये दो सोच में फर्क है। उनकी सोच है – पैसे पडे़ पर नहीं उगते हैं। हमारी सोच है – पैसे खेत और खलिहानों में उगते हैं। और मजदूरों के पसीने से पलते हैं ये हमारी सोच है। उनकी सोच है – समाज तोड़ो, राज करो। हमारी सोच है – समाज को जोड़ो विकास करो। ये फर्क है। उनकी सोच है – वंशवाद। हमारी सोच है – राष्ट्रवाद। उनकी सोच है राजनीति सब कुछ है। हमारी सोच है, राष्ट्रनीति सब कुछ है। उनकी सोच है, सत्ता कैसे बचाएं। हमारी सोच है देश कैसे बचाएं। अभी-अभी उन्हानें कहा कि चुनाव में उसको टिकट दी जाएगी जिनके दिल में कागं्रेस है। उनकी सोच है, देश वो चलाएगंे जिनके दिल में कांग्रेस है। हमारी सोच है, टिकट उनको मिलेगी जिनके दिल में भारत माता है। ये सोच में फर्क है और इसलिए भाईयों-बहनों जब 2014 चुनाव का वक्त हमारे सामने है हम जब चुनाव के मैदान में खडे़ हैं तब मैं देशवासियों से कहना चाहता हूं के पिछले 60 साल आपने शासको को चुना है। 60 साल आपने शासक पसंद किये हैं। 60 साल आपने शासकों को बागडोर दी है। मैं आज भारतीय जनता पार्टी केइस पवित्र मचं से मेरे देशवासियों से प्रार्थना करता हूं आपने 60 साल शासकों को दिए। 60 महीने इस सेवक को देकर देखिए। 60 महीने इस सेवक को देकर देखो, देश को शासक नहीं सेवक की जरूरत है। और लोकतंत्र की मांग यही है कि देश की सेवा करने का हर किसीको अवसर मिले। भाईयों – बहनों आज जब हम आने वाले भविष्य का एक खाका खिंच रहे हैं तब देश के सामने महंगाई एक सबसे बडी़ समस्या है। गरीब के घर में चूल्हा नहीं जलता है। मां के बच्चे रात-रात भर रोते हैं आंख के आंसू पीकर सोते हैं। क्या भाईयों-बहनों क्या महंगाई रोका नहीं जा सकता है? क्या कोई उपाय नहीं है, भाईयों-बहनों आज देश की स्थिति क्या है। हमारे पास कोई रियल टाईम डाटा ही नहीं होता है। खेती का सीजन आया कहां कितनी फसल बोई जा रही है, कोई रियल टाईम डाटा नहीं। कौन सा अन्न, कौन सी पैदावार कितनी हुई उसका रियल टाईम डाटा नहीं है। हमारी पहली प्राथमिकता रहेगी कि देश के कृषक जोखेती के क्षेत्र में काम करते हैं। हम एक रियटल टाईम डाटा को टेक्नोलॉजी के द्वारा एक मैकेनिज्म विकसित करेंगे और देश को समय रहते पता चलेगा कि इस बार ये फसल इतनी बोई गई है। और फसल होने पर पता चलेगा कि इस वर्ष इतनी फसल की पैदावार हुई है। इतनी हमारी आवश्यकता है। आवश्यकता का भी रियल टाईम डाटा होना चाहिए। और वह हर भू-भाग का होना चाहिए। और हम उसके आधार पर तय कर सकते हैं कि अगर देश की इतनी आवश्यकता है। इतनी फसल है तो समय रहते इम्पोर्ट करना क्या एक्पोर्ट करना उसका फैसला कर सकते हैं। आज क्या हो रहा है। एक तरफ देश में जरूरत हो उसी को दूसरे रास्ते से एक्सपोर्ट कर दिया जाता है। देश भूखा मर रहा है और फिर उसी चीज को फिर इम्पोर्ट किया जाता है। पता नहीं कौन सा कारोबार होगा। और इसलिए भाईयों बहनों हमारा आग्रह है। और हमें विश्वास है। कि सामान्य व्यक्ति को महंगाई की मार झेलनी ना पडे़। किसानों का शोषण न हो और इसलिए एक प्राईस स्टेबिलाईजेशन फण्ड की रचना होनी चाहिए इस देश में और प्राईस स्टेबिलाईजेशन फण्ड के द्वारा सरकार के द्वारा हस्तक्षेप करके गरीब की थाली को हमेशा सलामत रखा जाए इसकी चिंता की जाए। इसी प्रकार से समयकी मांग है देश में एक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट खडा़ किया जाए। इतना ही नहीं कालाबाजारी करने वालो के लिए विशेष अदालते बनाई जाएं। और समय सीमा के अंदर इन कालाबाजारियों को सजा देकर के हिन्दुस्तान के अन्दर इस प्रकार की प्रवृत्ति को रोका जाए। अगर हम इस प्रकार के एक के बाद एक कदम उठाएं भाईयों बहनों अगर अटल जी की सरकार महंगाई रोक सकती है। अगर मोरारजी भाई देसाई की सरकार महंगाई रोक सकती है। तो 2014 में भाजपा की सरकार भी महंगाई रोक सकती है ये मैं आपको विश्वास दिलाता हूं। भाईयों बहनों बेरोजगारी जिस देश के पास इतना बडा़ युवा धन हो लेकिन रोजगार के लिए तड़पता हो इसके लिए भाईयों-बहनों हमें सेंटर फॉर एक्सीलेंस उसको बल देने की आवश्यकता है। हमें स्किल डिवेलपमेंट पर बल देने की आवश्यकता है। और स्किल डिवेलपमेंट भी निवेश कैसे किया जाए। अगर यहां कैमिकल की फैक्ट्री लग रही हैं तो उस कैमिकल की फैक्ट्री में काम आने वाला स्किल डेवलपमेंट कैसा हो। यहां पर ऑटोमोबाईल इंडस्ट्री लग रही है तो ऑटोमोबाईल इंडस्ट्री लगने से पहले उसके स्किल डेवलपमेंट वाले लोग कैसे तैयार हों अगर इसको हम ढंग से करें तो भाईयों-बहनों हम बेरोजगारी के खिलाफ लडा़ई अच्छी तरह से लड़ सकते हैं। भाईयों बहनों हमारे पास ह्यूमन रिसोर्स का कोई प्लानिगं नहीं है। आज अगर देश में पूछा जाए कि बताईए 2020 में विज्ञान के कितने शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी। देश नहीं बता पा रहा है। 2020 में कितने नर्सों की जरूरत पड़ेगी देश बता नहीं पा रहा है। अगर हम ह्यूमन स्टेंªथ का अभी से प्लानिंग करें और उसको कब और उसके अनुसार हम डेवलपमेंट करें तो जैसे ही वह व्यक्ति तैयार होगा उसको जरूरत के अनुसार रोजगार मिलजाएगा। भाईयों-बहनों हिन्दुस्तान का ये युवा धन इस हिन्दुस्तान की शक्ति है उसके हाथ में हुनर देना चाहिए। कार्य का अवसर देना चाहिए। भारत की ग्रोथ को आगे बढ़ाने के लिए इससे बडी़ कोई पूंजी हमारे पास नहीं हो सकती। हम उसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। भाईयों-बहनों आदरणीय आडवाणी जी ने कालेधन के खिलाफ एक बहुत बडी़ जंग छेड़ी है। हम भारतीय जनता पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता का कमिटमेंटेड है कि आडवाणी जी ने जो सपना संजोया है हम पूरा करके दिखाऐंगे। जो भी कानूनी व्यवस्था करनी पड़ेगी वो कानूनी व्यवस्था की जाएगी। उसके विषय के ज्ञाताओं का टास्क फोर्स बनाना होगा तो टास्क फोर्स बनाया जाएगा। लेकिन दुनिया के देशों में हिन्दुस्तान से लूटा गया सामान, रुपए-पैसे रखे गए हैं एक-एक पाई लाई जाएगी और गरीब की भलाई में लगाई जाएगी। भाईयों-बहनों आज ग्लोबलाईजेशन का यह जमाना है। और ग्लोबलाईजेशन के इस जमाने में हम अकेले एक देश के नाते काम नहीं कर सकते। हमें विश्व की स्पर्धा में अपने को टिकाना होगा, आगे बढ़ाना होगा। अगर विश्व के सामने हमें टिकाना है और बढ़ाना है तो जैसे गुड गवर्नेंस का महत्व है वैसा ही ह्यूमन रिर्सोस का महत्व है। और वैसा ही इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्व है। भाईयों-बहनों अब भारत को देर नहीं करनी चाहिए। नेक्सट जनरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर बल देना चाहिए। रोड हों, रास्ते हों, रेल हों लेकिन आने वाले दिनों में वाटरग्रिड कैसे हों, नदियों को जोड़ने का काम कैसे हो। एग्राइंफ्रास्ट्रक्चर को बल कैसे दिया जाए। गैस ग्रिड कैसे हों, अगर गैस ग्रिड हो तो ये गैस सिलेण्डर के झगड़े बंद हो जाऐंगे ऑप्टीक्ल फाइवर नेटवर्क क्यों न हों, पूरा देश ऑप्टीक्ल फावबर नेटवर्क के नेट जनरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में क्यों न किया जाए। हिन्दुस्तान का इतना बड़ा विशाल समुद्री तट है। वहां पर नई इंफ्रास्ट्रक्चर की विधा खड़ी करके विश्व व्यापार में हम अपनी जगह क्यों न बना सकें। भाईयों-बहनों हमारे पास इतनी बड़ी रेलवे है। दुर्भाग्य है मित्रों देश में रेलवे की तरफ ध्यान नहीं दिया। यही रेल देखिए जापान में कैसे बदलाव आया। क्यों आया, जापान ने बुलेट टेªन का कॉन्सेप्ट लाया। और पूरे देश को खड़ा कर दिया। चाईना ने भी उसको फोलो किया। हमारे पास इतनी बडी़ रेल लाईन है। लेकिन उसकी आधुनिकता पर ध्यान से नहीं सोचा जा रहा। रेलवे की अपनी चार यूनिवर्सिटी क्यों न हो देश में। जहां पर रेलवे को जिस प्रकार कौमन पावर चाहिए। उसे मैन पावर मिले। रेलवे को आधुनिक बनाने का जो रिसर्च होना चाहिए। जो इनोवेशन होना चाहिए उसकी अपनी युनिवर्सिटी क्यों न हो। भाईयों बहनों सोच का फर्क है। विचार कोई करे समय लगाए देखें। भाईयों-बहनों आप कल्पना नहीं कर सकते रेलवे हिन्दुस्तान की कितनी बड़ी ताकत बन सकता है। आज का रेल का जो नेटवर्क है उसी को आधुनिक बनाया जाए तो हम हिन्दुस्तान की विकास की यात्रा को एक नई गति देस कते हैं। भाईयों बहनों वाजपेयी जी ने स्वणिर्म चतुर्भुज योजना का निर्माण किया था। उस स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने देश को दुनिया के अन्दर एक अलग जगह दे दी थी। भाईयों बहनों समय की मांग है कि आठ-नौ साल के बाद भारत की आजादी के 75 वर्ष होंगे डायमण्ड जुबली का समय आएगा। क्या समय की मांग नहीं है कि हम अटलजी के उस सोच को और एक नया रंग रूप देकर के बुलेट ट्रेन का चतुभुर्ज तैयार करें और जब देश 75 सालकी डायमण्ड जुबली मना रहा हो तब देश को बुलेट ट्रेन से कम से कम चार दिशाओं में जाने का काम हम खड़ा कर दें आप देखिए दुनिया देखगी नए सिर से हिन्दुस्तान को देखने लगेगी। भाईयों बहनों आज विश्व के अन्दर मैंने कहा हम अलग-थलग हिन्दुस्तान सोच नहीं सकते हमारे साथ, हमारे देश में गुनाहगार कौन है, कौन नहीं उसकी मैं चर्चा नहीं कर रहा। लेकिन एक समाज के नाते, एक सभ्य समाज के नाते सुशिक्षित, संस्कारी समाज के नाते आज हमारी माताओं-बहनों के साथ जो हो रहा है। दुनिया में हम मुंह दिखाने के लायक नहीं हैं। ये हम सबका दायित्व बनता है नारी सम्मान का, नारी सुरक्षा का। कपहदपजल व मिउमद ये हमारा सामाजिक दायित्व बनना चाहिए। और उस माहौल को हमें बनाना होगा। कानून के साथ-साथ समाज जीवन की इस व्यवस्था को भी हमें खड़ा करने के लिए प्रयास करना होगा। हमने एक मिशन माडे पर बेटी बचओ बेटी पढ़ाओ मिशन मोड़ पर आगे बढ़ना होगा। मां के गर्भ में 21वीं सदी में बेटी को मार दिया जाए। भाईयों-बहनों इससे बड़ा कोई कलंक नहीं हो सकता। लाखों बेटियों मां के गर्भ में मारी जा रही हैं। ये हम सब का दायित्व है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ। इस मिशन को लेकर हम कैसे आगे बढ़े। भाईयों-बहनों हमें अब नारी की तरफ देखने का दृष्टिकोण भी बदलना होगा। हमारी नारी जिसको हमने होम मेकर के रूप में देखा है। अब समय की मांग है कि हम हमारे देश की नारी को नेशन बिल्डर के रूप में देखें अगर हम उसको नेशन बिल्डर के रूप में देखेंगे हमारी सोच बदलेगी और हम विश्व के सामने एक नई शक्ति के रूप में उभर सकते हैं। भाईयों बहनों हमारे देश का एक दुर्भाग्य रहा कि जिस समय हमने अर्बनाईजेशन को एक आपर्च्यूनिटी मानना चाहिए था। हमने अर्बनाईजेशन को चैलज मान लिया। एक संकट मान लिया। और हमारी सारी मुसीबतों का कारण एक है। गलत सोच रही है। भाईयों बहनों अर्बनाईजेशन को एक अवसर मानना चाहिए। विकास के अन्दर उसको एक महत्व के रूप में स्वीकार करना चाहिए। नीतियों का निर्धारण उस रूप में करना चाहिए। क्यों न हमारे देश में 100 नए शहर बने। आधुनिक शहर बने। वाक टू वर्क कॉन्सेप्ट के रूप में बने। स्मार्ट सिटी बने। आवश्यकतानुसार कहीं हेल्थसिटी बने। स्पोर्ट सिटी बने। ये स्पेशलाइज सिटी क्यों न बनें, भाईयों बहनों अगर हम चाहें तो हम 100 नए शहरों का सपना आज देश की आवश्यकता के लिए कर सकते हैं। भाईयों बहनों 100 नए शहरों की जैसे जरूरत है। वैसे दो शहर जो पास-पास हैं उसके लिए ट्रिनसिटी का कान्सेप्ट हमें डेवलप करना चाहिए। जैसे न्यूयार्क-न्यूजर्सी है। हमने ट्रिन सिटी कान्सेप्ट को डेवलप करना चाहिए विकास का एक नया मॉडल उसमें से हमें मिल सकता है। उसी प्रकार से बड़े शहरों के आस पास सेटलाईट सिटीस इसकी पूरी जाल बनानी चाहिए। एक अवसर के रूप में लें और आप कल्पना कर सकतें हैं कि जब इतना सारा काम शुरू होगा। कितना सीमेंट चाहिए, कितना लोहा चाहिए, कितने सीमेंट के कारखाने चाहिए। कितने लोहे के कारखाने चाहिए। कितने नौजवान चाहिए। कितने बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। आप अन्दाज कर सकते हैं। देश की जीडीपी की जो चिंता हो रही है। उसका जवाब इसमें से मिल सकता है। भाईयों बहनों क्या आजादी के इतने साल के बाद गरीब के पास घर नहीं होना चाहिए। क्या छत के बिना जिंदगी गुजारने के लिए उसको मजबूर होना पड़े। क्यों न हम करोड़ों मकान बनाने का सपना लेकर के और राज्यों को उसमें जोड़कर के मिशन मोड में हर राज्य उसमें जुड़ जाए। केन्द्र और राज्य मिलकर गरीब से गरीब व्यक्ति पर भी घर हो उसकी दिशा में आगे बढ़ें। भाईयों बहनों जल, जमीन, जंगल, कृषि, पशु इसके बिना देश का काम नहीं चलेगा। हमारी कृषि आधुनिक बने। प्रोडक्टिविटी बढ़े। पर ड्रॉप, मोर क्रॉप इस कॉन्सेप्ट को हम साकार करें। एक-एक बून्द पानी से फसल कैसे पैदा हो। ड्रिप ऐरिगेशन हो। आधुनिक विज्ञान को कैसे स्वीकार करें। नीतियों को कैसे प्रोत्साहन दिया जाए। भारत के लिए आवश्यक फसल के लिए बेस्ट डेवलपमेंट के लिए एक मिशन मोड पर अगर काम करें। भाईयों बहनों एग्रो इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। एग्रोइंफ्रास्ट्रक्चर के साथ नदियों को जाड़े ऩे वाले जो कॉन्सेप्ट अटलजी ने दिया है उस अटलजी को स्वप्न को साकार करने के लिए नदियों के जोड़ऩे वाले काम को हमें आगे बढ़ाना पड़ेगा। और भाईयों-बहनों गुजरात में अमूल डेरी इतने सालों से चल रही है। क्या हिन्दुस्तान के बड़े राज्यों में श्वेत क्रांति नहीं हो सकती। क्या वहां का हमारा किसान दूध उत्पादन करके उस राज्य की दूध की आवश्यकता की पूर्ति करें इतना ताकतवर नहीं बन सकता है। भाईयों बहनों हमें उस दिशा में आगे करके देखना होगा ताकि हमारे किसान को कभी मुसीबत झेलनी न पडे़। और इसलिए मैं कहता हूं। अगर हमें कृषि विकास करना हे तो एक वन थर्ड एग्रीकल्चर, वन थर्ड एनिमल हसबेंडरी और वन थर्ड ट्री प्लान्टेशन। देश का दुर्भाग्य देखिए हमारे यहां जमीन को नापा नहीं गया है आज सेटेलाईट टेक्नोलॉजी के माध्यम से तत्काल किसानों की जमीन कितनी है, साईज क्या है, उसका पूरा लेखा जोखा उसको देना चाहिए। तो आज वो अपनी बाढ़ करने के लिए जो जमीन वेस्ट करता है, वह नहीं करेगा। और उस किनारे पर पेड़ लगाएगा तो आज हम एक टिम्बर वुड इम्पोर्ट करना पड़ता है। हम वह टिम्बर इम्पोर्ट करने से बच जाएगंे और इसलिए हमने भाईयों-बहनों टिम्बर इम्पोर्ट करने से बचना है ता,े और हमारे किसान को ताकतवर बनना है तो हमंे इस बात पर बल देते हुए आगे बढ़ने की दिशा में काम करना होगा और मुझे विश्वास है कि अगर मित्रों हम उन बातों को करते हैं तो हम परिस्थिति को पलट सकते हैं। उसी प्रकार से बिजली। कैसा देश है, 20 हजारमेगावाट बिजली के कारखाने बन्द पड़े हैं फ्यूल नहीं है। कोयले की खदानें बन्द पड़ी हैं। क्या हम सपना नहीं देख सकते, पावर ऑन डिमांड अगर राज्य जिम्मेदारी ले केन्द्र मदद करें। 24 घंटे बिजली हर घर में पहुंचाई जा सकती है। सामान्य व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। भाईयों-बहनों शिक्षा अगर 21वीं सदी में दुनिया के सामने हमें अपना सिर ऊंचा रखना है तो शिक्षा में हमें कोई कम्प्रामेाईस नहीं होना चाहिए। हमारी प्राईमरी एजुकेशन को हमें और अधिक बल देने की आवश्यकता है, उसके साथ-साथ क्यों न हिन्दुस्तान के हर राज्य में आईआईएम क्यों न हो। क्यों न हिन्दुस्तान के हर राज्य में आईआईटी न हसे। क्यों न हिन्दुस्तान के हर राज्य में आईआईएम हो, आईआईटी हो, एम्स हो। हमारी शिक्षा को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में हमारा प्रयास हो। और हम उसको आगे बढा़ ना चाहते हैं। भाईयों-बहनों हेल्थ सेक्टर आज अगर गरीब के घर में बीमारी आ जाए। मध्यम वर्ग के परिवार में बीमारी आ जाए। तो उसकी आर्थिक स्थिति चरमरा जाती है। वो तबाह हो जाता है। और इस लिए हमें एप्रोच को बदलने की आवश्यकता है। जैसे शिक्षा में टिचिंग एप्रोच को छोड़कर लर्निंग एप्रोच में जाने की आवश्यकता है। उसी प्रकार से हेल्थ सेक्टर में आज हम सिक्नेस को ऐड्रेस करते हैं हमें आवश्यकता हम वेलनेस को एड्रेस करें। हम बीमारी को की चिंता करते हैं। हम स्वास्थ्य की चिंता कम करते हैं। और इसलिए प्रिवेंटिव हेल्थ केयर पेरामेडिकल फोर्सेस ये सारी शक्तियों को कैसे जोड़ा जाए। भाईयों-बहनों हेल्थ इंश्योरेंस की बात बहुत हो रही है। 21वीं सदी में हमें गारंटी देनी होगी। हेल्थ इंश्यारेंस में अटकना नहीं है। हेल्थ इंश्योरेंस का वादा करना होगा। हेल्थ इंश्योरेंस का वादा करके हमें आगे  बढ़ना होगा। भाईयों बहनों क्यों गरीबी के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। क्या गरीबी सिर्फ नारों का विषय बन जाएगा। भाईयों-बहनों मैं विश्वास से कहता हूं, हमारी आर्थिक योजना के द्वारा जन भागीदारी के द्वारा। स्मॉल स्केल कॉटेज इन सारी पॉलिसीज के द्वारा हम गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ सकते हैं। और गरीबी की लड़ाई लड़ने के लिए गरीबों का सशक्तिकरण होना चाहिए। इम्पावरमेंट ऑफ पूअर। उसको भी गरीबी से बाहर आना है। हमें उसको अवसर देना चाहिए। और जहां-जहां हमने अवसर दिए हैं हमें परिणाम मिले हैं। उसको हमें आगे बढ़ाना है। भाईयों-बहनों इसके उपरांत एक और महत्वपूर्ण बात मैंने कहा कि दुनिया के सामने जब ताकत से खडा़ रहना है। तो भाईयों बहनों हमारे भारत का ब्रांडिंग भी होना चाहिए। हम जानते हैं बहुत साल पहले हम कोई भी चीज खरीदते थे तो यह लिखा होता था मेड इन जापान। तो हम तुरंत उस चीज को हाथ लगा देते थे। भाईयों बहनों क्या यह समय की आवश्यकता नहीं है कि हम भी ब्रांड इंडिया की ओर बल दें और जब मैं ब्रांड इंडिया की बात करता हूं तब मैं फाइव-टी की बात करता हूं। टेलेंट, टेªडिशन, टूरिज्म, ट्रेड, टेक्नोलॉजी। ये पांच-टी ऐसे हैं जिसके भरोसे हम ब्राण्ड इंडिया को लेकर के विश्व को एक बाजार बनाने की ताकत खड़ी कर सकते हैं मित्रों भारत उत्पादन करे, दुनिया खरीद करे, लेकिन इसके लिए हमने टेक्नोलॉजी में अपग्रेडेशन करना होगा। हमारी टेलेंट का भरपूर उपयोग करना होगा। हमारी टेªडीशन को दुनिया भर में परिचित कराना होगा। टूरिज्म बहुत ताकत होती है। भाईयों बहनों टेरेरिज्म डिवाईड, टूरिज्म यूनाईट। टेरेरिज्म तोड़ता है टूरिज्म जोड़ता है। भाईयों बहनों हम टेक्नोलॉजी, टेªड, परम्पराओं को हम आगे लेकर के चलें। भाईयों बहनों इन दिनों एक नई शब्दावली हमारे सामने आई है। मैं आज उसकी भी चर्चा करना चाहता हूं। कुछ लागे कह रहे हैं माई आइडिया ऑफ इंडिया। हिन्दुस्तान के सवा सौ करोड़ देशवासियों के आइडिया ऑफ इंडिया हो सकता है। ये किसी की जागीर नहीं हो सकता। आपका भी हो सकता है। इनका भी हो सकता है। यहां पर बैठे लोगों का भी हो सकता है। मेरा भी हो सकता है। और इसलिए आइडिया ऑफ इंडिया इसको कहीं बांधा नहीं जा सकता। मैं आज माई आईडिया ऑफ इंडिया की बात आप सबके साथ प्रस्तुत करना चाहता हूं। भाईयों बहनों माई आइडिया ऑफ इंडिया सत्यमेव जयते, माई आईडिया ऑफ इंडिया वसुधैव कुटुम्बकम्, माई आईडिया ऑफ इंडिया अहिंसा परमो धर्मः, माई आईडिया ऑफ इंडिया आ नोभद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः, माई आईडिया ऑफ इंडिया सर्व पंथ समभाव, माई आइडिया ऑफ इंडिया सर्वे भवन्तु सुखिनः- सर्वे सन्तु निरामयाः, माई आईडिया ऑफ इंडिया सह नाववतु, सहनौ भुनक्तु, सह वीर्यं करवावहै, माई आइडिया ऑफ इंडिया न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नपुनर्भवम्, कामये दुःखतप्तानां प्राणिनामार्तिनाशनम्, माई आइडिया ऑफ इंडिया जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी, माई आइडिया ऑफ इंडिया पौधों में परमात्मा होता है, माई आइडिया ऑफ इंडिया वैष्णव जन तो तेने कहिये, जे पीड परायी जाणे रे, माई आइडिया ऑफ इंडिया यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः, माई आईडिया ऑफ इंडिया नारी तू नारायणी, माई आइडिया ऑफ इंडिया दरिद्र नारायण सेवा, माई आइडिया ऑफ इंडिया नर करनी करेतो नारायण हो जाए, माई आइडिया ऑफ इंडिया तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै, माई आइडिया ऑफ इंडिया यत्रैतास्तु न पूज्यंते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः। भाईयों-बहनों माई आइडिया ऑफ इंडिया कि जब मैं बात कर रहा हूं तब और जब हम 2014 के चुनाव में जा रहे हैं तब आप सब मेरे साथ, नारा बुलवायेंगे दोनें मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से बोलेंगे मैं बोलूंगा उसके बाद आपको बोलना है। वोट फॉर इण्डिया। मैं बोलूं उसके बाद आपको बोलना है। वोट फॉर इण्डिया। दोनों हाथ ऊपर करके बोलेंगे – वंशवाद की मुक्ति के लिए-वोट फॉर इण्डिया, भाई-भतीजावाद की मुक्ति के लिए-वोट फॉर इण्डिया, भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए- वोट फॉर इण्डिया, महंगाई से मुक्ति के लिए- वोट फॉर इण्डिया, कुशासन से मुक्ति के लिए-वोट फॉर इण्डिया, देश की रक्षा के लिए-वोट फॉर इण्डिया, जन-जन की सुरक्षा के लिए-वोट फॉर इण्डिया, रहने को घर के लिए-वोट फॉर इण्डिया, खाने को अन्न के लिए-वोट फॉर इण्डिया, बीमार की दवाई के लिए-वोट फॉर इण्डिया, दरिद्रनारायण की भलाई के लिए-वोट फॉर इण्डिया, शिक्षा में सुधार के लिए-वोट फॉर इण्डिया, युवाओं को रोजगार के लिए-वोट फॉर इण्डिया, नारी के सम्मान के लिए-वोट फॉर इण्डिया, किसानों के कल्याण के लिए – वोट फॉर इण्डिया, स्वावलंबी भारत के लिए – वोट फॉर इण्डिया, शक्तिशाली भारत के लिए – वोट फॉर इण्डिया, समृद्धशाली भारत के लिए – वोट फॉर इण्डिया, प्रगतिशील भारत के लिए – वोट फॉर इण्डिया, भारत की एकता के लिए – वोट फॉर इण्डिया एक भारत, श्रेष्ठ भारत के लिए – वोट फॉर इण्डिया, सुराज की राजनीति के लिए – वोट फॉर इण्डिया, सुशासन की राजनीति के लिए – वोट फॉर इण्डिया, विकास की राजनीति के लिए – वोट फॉर इण्डिया, भाईयों-बहनों वोट फॉर इण्डिया का हमारा जो सपना है। देशवासी भाईयों बहनों हम यहां से जब विदाई लेंगे। आदरणीय आडवाणी जी का आशीर्वाद लेकर हम अपने लोक में जा रहे हैं हम विजय का व्रत लेकर जाएं। हम तो विजयीव्रती बनें। हमारे हर साथी को विजयीव्रती बनाएं। और भाईयों बहनों एक बात याद रखें कि चुनाव का विजय का गर्भाधान चुनाव की विजय का गर्भाधान पोलिंग बूथ में होता है। पोलिंग बूथ विजय की जननी होती है। और जो जननी होती है उसकी हिफाजत करना हमारा दायित्व होता है। इसलिए पोलिंग जब हो पोलिंग बूथ की चिंता हो, पोलिंग बूथ जितने का सकंल्प हो। इस संकल्प को लेकर आगे बढे़ं और भारत दिव्य बनें। भारत भव्य बनें। इस सपने को साकार करने के लिए देशवासियों की शक्ति को साथ लेकर के वोट में परिवर्तित करें। इसी अपेक्षा के साथ मैं राष्ट्रीय नेतृत्व का बहुत आभारी हूं कि मुझ जैसे एक साधारण व्यक्ति को यह काम दिया है। और इसीलिए भाईयों-बहनों जब एक चाय वाला चुनाव लड़ता है, आप देश को कहेंगे – मोदी जी एक ऐसे इंसान हैं जिसके पास अपना कुछ नहीं है। और आप कहेंगे – तो दस करोड़ परिवारों से फण्ड जरूर मिलेगा। गरीब से गरीब व्यक्ति भी इस बार भाजपा को धन देने के लिए आगे आएगा। और हम तय करें मित्रों हिन्दुस्तान के सामान्य नागरिक के धन से हम चुनाव लड़ेंगे। अभी केरल के हमारी कार्यकर्ताओ ने करके दिखाया। 2012 के गुजरात के चुनाव में गुजरात के कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर के पांच रुपए – दस रुपए, 100 रुपए इकट्ठा करके चुनाव लडा़। 2012 दिसम्बर में तीन-तीन बार सरकार और एक प्रकार से गुजरात में तो सात बार से सरकार है। लेिकन मुझे चार बार से अवसर मिला है। कार्यकर्ताओं ने लोगों से पैसे लेकर के धनसंग्रह करके चुनाव लड़ा हमें इस परम्परा को आगे बढ़ाना है। इसको निभाना है। और जब एक गरीब मां का बेटा, एक चाय वाला मैदान में हो तो  हमारे देश के भण्डार भर देगा। ये मेरा विश्वास है।

Speech of Shri Anurag Thakur in BJYM Ambassador Programme on 07/01/14

Honorable Shri Rajnath Singh Ji, National President, Bhartiya Janata Party. Nitin Navin Ji, National General Secretary, BJP Yuva Morcha and MP from Patna…  Rahul Kothari Ji, National General Secretary, Swadesh Singh Ji, Vice President, Yuva Morcha and the very young MP Harsh Sanghvi Ji. And all the brothers and sisters present in the convention and friends from media.

I would like to start the proceedings with an incident of the great French Emperor Nepoleon. Once Nepoleon wanted to know his future and went to an astrologer. When he showed his hand then the Astrologer replied that you don’t have line of fortune. Everyone was shocked to hear that but Nepolian took his knife out and cutting his palm draw a line. He again showed his hand to astrologer and asked that now tell me my fortune. The Astrologer replied that how can I tell the fortune of a person who had himself drawn his line of fortune. Today I’m standing in front of such youths who are not only going to set their future but of the entire country. And such program is going to begin in the presence of respected Party President Shri Rajnath Singh who took Bhartiya Janata Party to new heights. Today we are going to begin the BJYM Campus Ambassador Program. What we want to do through this program?  In India there are 80 crore youths that is the 70 % of the total population. Youths are willing to make their future bright and want to see India as a super power. And I believe youth being the largest take holder has to play a very important role in the nation building process. And how these youths will be organized in the making of the nation has been imagined by the Bhartiya Janata Yuva Morcha.

With this program we will reach to the country’s 2.25 crore youths studying in 523 universities and more than 12,000 colleges.  43 lakh youths are pursuing distance education. Approximately 33 Lakh youths are pursuing diploma course. And there are more than approximately one lakh twenty thousand faculty members. We want to reach them and start a new innings in politics with new thought, new hope and new people.

Brothers and sisters, through this program our endeavor would be to reach to the youths studying in colleges nationwide and they have to fill this form of BJYM campus Ambassador Program online. Evaluation of how good their speaking skills an    d organizational skills are will be done. How will they promote Bhartiya Janata Party. With the ideology of BJP they can add youths of their colleges with the party.   And the most important work will be to create awareness regarding voter registration and to vote as in democracy if there is any weapon then it is vote and the wound of vote is too deep.  And in the upcoming polls we will give that wound to congress and make India congress free.

Friends with this Campus Ambassador Program we want youths to choose good leaders and leaders for the future. Through this Campus Ambassador Program Bhartiya Janata Party will make the leaders for the future from here. I want to tell these things because for congress youth is mere vote bank but for BJP they are not only future but also the change maker of today. And I believe that if we think youths are the change-makers of today then in the new politics we will have to focus on three things that are education, employment and empowerment. The key element for the new politics will be education, employment and empowerment. BJYM Campus Ambassador Program aims to bring together different colleges and universities together. Our focus would be to the empowerment that has to be done of youths and from them we would like to know that what the youths of the nation want. 80 Crore youths reside in the nation’s villages, metros, tier 1, tier 2 and tier 3 cities. They belong to different caste and religion. Everyone have their own ideas and ambitions. And by knowing their ideas we want that when BJP comes to power after four months then the youth policy not only get prepared by the Bhartiya Janata Party but the campus ambassadors chosen through this campus ambassador program shall finalize youth policy after knowing the views of the crores of youths of the nation.  Our effort is that if the youth policy is finalized then it has to be by the youths.

Friends… Respected Party President has got time for us out of his busy schedule. When we requested him that we have to start this program then he said that whatever happens I have to go in the program of youths. Respected National Party President Shri Rajnath Singh has also been the National President of Yuva Morcha. And he is very much attached to the youths and Yuva Morcha. Today when Bharatiya Janta Yuva Morcha is going to reach to the nation’s more than 523 universities, more than 12000 colleges and crores of youths, with that the youths of the nation are ready to work hard and campaign to any extent for making Modi ji the Prime Minister of India then what would be bigger for us that this program is going to be started by respected Shri Rajnath Singh.

Respected President, when campus ambassador will be appointed for the first phase till 17th of January, after that our effort will be to arrange voter registration programs and voter registration awareness programs from 17th of January to 31st of January in the entire campus.    Not only this but on the same day 17th of January, vote for India campaign throughout the country will be launched, so that along with India’s first and largest campus ambassador program, voter registration awareness campaign will also begin.  Vote for India campaign will also begin and these crores of youths through the campuses will connect with the ideas of the Bhartiya Janata Party. Our endeavor would be to start Modi Café in the nation’s colleges and universities during ‘Vasant Panchmi’ in February, so as to conduct sessions where the ideology of BJP, NDA VS UPA, how BJP believes in good governance and how Atal Ji gave employment to 6 crore 25 Lakh people compared to the 27 lakh given by Congress that was 30 times bigger and how people will get employment when Shri Narendra Modi will emerge will be discussed and worked on.

Friends, today’s youths want a better education, employment and empowerment. I just want to assure you all, Bhartiya Janata Party has given good governance, employment and a chance to enhance the youths in its ruling states. We will try our level best that on the one side, where the country is going through the phase of a change, where youths are excited and aggressive. These youths will be connected and guided to renovate a well-nation. And just we would target 76th Independence Day of 2022, when our prime minister would be unfluring the National Flag from Lal-Quila, at that moment, proudly we can say India as developed country. We have to achieve this goal in next 10 years and truly speaking if in this country anyone can play a vital role to change the policy of the country, no doubt, that is ‘youth’. I hope, being with Bhartiya Janta Yuva Morcha, students of colleges-universities will choose a better government and having this we will have a developed India. And we will build that India which can become ‘world-guru’. Once again by the side of Bhartiya Janta Yuva Morcha I say thanks to Respected Shri Rajnath Singh for his great presence in this campus ambassador program and want to say all my friends who are going to join Bhartiya Janta Yuva Morcha to come forward and build India that will become a ‘world-guru’. Thanks to all of you a lot. Jai Bharat… Jai Bhajpa.

Speech of Shri Rajnath Singh in BJYM Campus Ambassador programme in english (07/01/14)

I congratulate and pray to god to give that merit, potential and talent to youths so that the dream to make India great comes true.  We are the citizens of a nation where 65% of the population is of youths. No any other country but India has that youth force. It is the biggest challenge for the youths as our country having such a youth force and given that there is no any shortage of natural resources is still called backward, counted poor and the country where there is extreme unemployment.

Bhartiya Janata Party deliberately decided to add all the youths of this country with the party through BJYM, as without the utilization of their potential, we will not be able to build that India what we want to. If we turn over the pages of history then indubitably we will come to the conclusion that for the first if there was someone who flagged off the Indian culture on international level then he was the one and only Swami Vivekanand. If I have to call someone global youth then it will be Swami Vivekanad as he was too young.

Shankaracharya was exceptional. What he did at the age of 16 was miraculous.  What youths can’t do? I believe that youths in the country have such potential that they can not only change their but the destiny of the nation.  On BJYM National President Anuraag Thakur Remarks that we want to see India as ‘Vishva Guru’, I want to add that only economic development can’t take India to that level. The need of the hour is economic plus spiritual development and then alone India can become ‘Vishva Guru’.

‘Our opponents call us a Hindu fundamentalist party but honestly I want to tell the youths that BJP is not a Hindu fundamentalist party but is the only political party that is development oriented national political party’. 

I know that today the information that has to be given regarding spiritualism is not been given through the educational system. Friends’ worshiping in Temple, Mosque and Church is not spiritualism.  In the entire universe the only sense oriented creature is human being. And that’s why humans are said to be emotion oriented. I want to tell you that the relation between a husband and a wife is not of blood but of emotions. The relation with our nation is not of blood but of emotions.

I would like to recall that when Chandra Shekhar Azad was fighting with the Britishers at the age of 26 then when he was left with a single bullet. He thought that if he gets killed by the foreign bullets of Britishers and therefore having thought of national pride he shot himself in the chest. What was that? Was it the relation between him and the earth? No it was the emotional relation between him and nation.  Ashfaq Ullah Khan at the age of 21 got hanged happily. His mother asked him to marry. But the day he was to be hanged he said I’m going to get married. The Magistrate asked him that where is the girl you are marrying with? Then he replied that the rope is my ‘Mahbuba’, whom I’m going to hug today. My friend this is what is called relation of emotion.

To enhance our mind is called spiritualism in our country.  You all are not only confined to knowledge but you also want luxurious life. Always remember, with mean mind one can’t be great and with broken heart one can’t stand. With an enhanced mind how happiness can be achieved let’s know it by a mathematical formula. Suppose that our mind is a circle. As you increase the circumference of the circle it will enlarge. If I have to explain it through a mathematical equation, I can say that circumference of mind is directly proportional to the magnitude of happiness. ‘Vasudhaiv Kutumbakam’ has been proclaimed from the Indian soil. And we have not only considered India but the world as the part our family. Not only India but we want to make the world great and this belief is only in India. And therefore I say that enhance your mind then alone we can make India ‘Vishva Guru’.

BJP is the only political party that is attached with the cultural stream. Today none of the political party has its own ideology and vision. Vision is that provides direction as well as sight and BJP is the party that can provide both. The greatest asset for a human being is credibility and if it goes everything vanishes.

Anurag Thakur whom we have made the President of BJYM is very dynamic and his performance in parliament has been great. Campus Ambassador Program has been initiated so as to prevent youths from getting in the wrong direction.

I am also M.Sc in physics. I have also been a teacher. I have also researched. But I could not get the degree in Directorate. In India if there is any language that is rich then it is Sanskrit. But nowadays it is vanishing. And therefore being the Education Minister of Uttar Pradesh I had implemented ‘Vaidik Mathematics’ and 36 books were written by our scholars.

‘Rajniti’ is derived from two Sanskrit words ‘Raj’ and ‘Niti’. Where ‘Niti’ means ‘Sanmarg’.  Unfortunately politics has lost it. I urge you all to take a pledge that we will recollect the word, the meaning and its value. Congratulations to all of you.

 

 

 

श्री राजनाथ सिंह जी का नेशनल BJYM कैंपस एम्बेसडर प्रोग्राम में दिया गया भाषण (07/01/14)

राजनीति को सही दिशा पर लाने के लिए संकल्प लें युवा

मित्रों,  मैं सबसे पहले आप सबको शुभकामनाएं देता हूं। इश्वर से प्रार्थना करता हूं कि देश के सभी युवाओं को योग्यता दें, क्षमता दें जिससे इस भारत को महान भारत बनाने में कामयाबी हासिल हो सके। मित्रों हम उस देश के नागरिक हैं जिस देश में लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या युवाओं की है। यानी हम कह सकते हैं कि इतनी बड़ी यूथ पावर अगर किसी के पास है तो वह भारत के पास है, बाकी किसी देश के पास नहीं है। जिसके पास इतनी बड़ी यूथ फोर्स हो, नेचुरल रिसोर्सेस की कमी न हो, वह देश आज भी पिछड़ा हुआ हो और उसकी गिनती दुनिया के पिछड़े देशों में हो, गरीब देशों में हो, बेरोजगार देशों में हो तो मैं समझता हूं कि इससे बड़ी चुनौती नौजवानों के लिए और दूसरी कोई नहीं हो सकती है। भाजपा ने बहुत सोच-समझकर भारतीय जनता युवा मोर्चा के माध्यम से हिन्दुस्तान के नौजवानों को पार्टी के साथ जोड़ने का फैसला किया है। क्योंकि बिना इनकी क्षमता का उपयोग किए हम भारत को वह भारत नहीं बना सकते हैं, जिसकी हमलोगों ने कल्पना की है।

भारत में इतिहास के पन्नों को अगर देखें तो पहली बार भारत के संस्कृति का ध्वज पताका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फहराने वाला अगर कोई है तो वह स्वामी विवेकानंद हुए। भारत का पहला ग्लोबल यूथ अगर मुझे किसी को कहना पड़े तो मैं स्वामी विवेकानंद जी को ही कहूंगा। संत महात्माओं के बारे में बात करें तो बड़ा काम जिसने कम आयु में किया है वो शंकराचार्य हैं जिन्होंने 16 वर्ष की ही आयु में मिसाल कायम की।

दोस्तों नौजवानों में अद्भुत क्षमता है। वह केवल अपना भाग्य ही नहीं, बल्कि भारत के भाग्य को भी बना सकते हैं। जैसा अनुराग ठाकुर ने कहा कि भारत को हम विश्व गुरु बनाना चाहते हैं, तो यहीं से मैं अपनी बात की शुरुआत करना चाहता हूं। भारत को अगर आप ‘विश्व-गुरु’ बनाना चाहते हो तो आपकी सोच एक-अंगीय नहीं होनी चाहिए। भारत आर्थिक रूप से केवल विकसित हो जाए तो इसी से केवल विश्व-गुरु नहीं बन सकते हैं। वैसे तो विपक्षी हम पर यह आरोप लगाते हैं कि- भारतीय जनता पार्टी इज अ हिन्दू फंडामेंटलिस्ट पार्टी। लेकिन मैं आप नौजवानों को बताना चाहता हूं कि- भारतीय जनता पार्टी इज द ओनली पार्टी इन द कंट्री, व्हिच इज नॉट अ हिन्दू फंडामेंटलिस्ट पार्टी, बट डिवेलपमेंट ओरिएंटेड नेशनल पोलिटिकल पार्टी। हम चाहते हैं कि भारत का इकोनॉमिक डिवेलपमेंट के साथ स्पिरिचुअल डिवेलपमेंट भी हो। मैं जानता हूं कि आज के इजुकेशनल सिस्टम के माध्यम से स्पिरिचुअरिज्म के बारे में जितनी जानकारी दी जानी चाहिए, वो नहीं दी जा रही है। दोस्तों, मंदिर में जाकर पूजा करना, मस्जिद में जाकर इबादत करना, गिरिजाघर में जाकर सजदा करना, यह अध्यात्म नहीं है। कोई सचमुच पूरी सृष्टि में मन प्रधान प्राणि है तो वह मनुष्य है। इसलिए मनुष्य को भावना प्रधान प्राणि कहा गया है। मैं बता दूं कि पति-पत्नी का रिश्ता भावनाओं का होता है, खून का नहीं होता है। अपने राष्ट्र के साथ जो रिश्ता होता है, वह भावनाओं का होता है, वह खून का नहीं होता है।

मैं याद दिलाना चाहता हूं कि चंद्रशेखर आजाद, जिन्होंने 26 साल की उम्र में अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते, गोलियां चलाते-लचाते जब अंतिम गोली बची तो सोचा कि कहीं अंग्रेजों की विदेशी गोली मेरे शरीर में नहीं लग जाए, इसलिए नेशनल प्राइड की सोच पर अपनी बंदूक की एक बची गोली को अपने सीने में उतार ली। वह क्या था, इस धरती के साथ कोई रिश्ता था ? नहीं, इस राष्ट्र के साथ उनका भावनाओं का रिश्ता था। अशफाक उल्लाह खां, 21 साल की जवानी, हंसते-हंसते फांसी पर झूल गए। मां कहती थी, बेटा शादी कर ले। लेकिन जिस दिन फांसी पर झूलने वाले थे, उस दिन कहा कि मैं निकाह करने जा रहा हूं। मजिस्ट्रेट ने पूछा कि कौन है लड़की जिससे तुम्हारी शादी हो रही है, तो उन्होंने कहा कि फांसी का फंदा मेरी महबूबा है जिसे आज गले से लगाने जा रहा हूं। यही भावनाओं का रिश्ता है, मेरे दोस्त। मन का बड़ा करना इसे ही हमारे यहां ‘अध्यात्म’ कहा गया है। आप जीवन में आनंद भी चाहते हो, केवल ज्ञान तो चाहते नहीं। याद रखिए। छोटे मन से कोई बड़ा नहीं हो सकता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं हो सकता। मन बड़ा होने से सुख कैसे प्राप्त होता है, इसे एक मैथमैटिकल फॉर्म से जानते हैं। मान लीजिए, मन हमारा सर्किल है। सर्किल का जो सरकमफेरेंस (परिधि) है, इसको जैसे-जैसे बढ़ाते जाओगे, ये बड़ा होगा। इसको अगर मैथिमेटिकल इक्वेशन में कहना हो तो मैं कह सकता हूं कि सरकमफेरेंस ऑफ मन इज डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू मैग्निच्यूड ऑफ सुख। दुनिया में वसुधैव कुटुम्बकम का उद्घोष भारत की धरती से हुआ है। और हमने केवल भारत को ही नहीं, बल्कि विश्व को अपने परिवार का सदस्य माना है। हम भारत को ही नहीं विश्व को भी श्रेष्ठ बनाना चाहते हैं और यह सोच केवल भारत में है। इसलिए मैं कहता हूं कि मन बड़ा करो तभी भारत को विश्व-गुरु बना सकते हैं।

मैं आपको बता दूं कि हिन्दुस्तान की अकेली राजनीतिक पार्टी है- भारतीय जनता पार्टी, जो सांस्कृतिक धारा के साथ जुड़ी हुई है। इसलिए हमने अपनी आइडियोलॉजी को जो स्वीकार किया है वो कल्चरल नेश्नलिज्म से किया है। आज किसी राजनीतिक पार्टी के पास कोई आइडियोलॉजी नहीं है, कोई दर्शन नहीं है। दर्शन वह है जो मनुष्य को दिशा के साथ दृष्टि भी देती है। दिशा और दृष्टि अगर कोई राजनीतिक पार्टी दे सकती है तो वह भारतीय जनता पार्टी है।

मित्रों, हम केवल सत्ता हासिल करने के साथ नौजवानों को अपने साथ नहीं जोड़ना चाहते। आज राजनीति में बहुत नए-नए एक्सपेरिमेंट्स हो रहे हैं। लेकिन मेरा मानना है कि आज व्यापक सोच, आइडियोलॉजी होनी चाहिए। एक संस्था में कोई कहे कुछ, कोई कहे कुछ तो ऐसे में वह संस्था नहीं चलती है। मेरा मानना है कि मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी पूंजी होती है- विश्वसनीयता। अगर एक बार विश्वसनीयता चली गई तो फिर उस पर यकीन नहीं किया जा सकता।

बहुत सोच-समझकर हमने भाजपा की यूथ विंग बनाई है और जिसे (अनुराग ठाकुर) हमने प्रेसिडेंट बनाया है, वो बहुत ही डायनेमिक है और उनका संसद में भी बढ़िया परफॉरमेंस रहा है। उनके पास बेहतर सोच है। कैंपस एम्बेसडर प्रोग्राम जो इन्होंने तय किया है। जिसके पास काल्पनिक क्षमता होगी, वही इस काम को कर सकता है। कैंपस में हम इसलिए जाना चाहते हैं ताकि हमारा नौजवान गुमराह न होने पाए। मैं भी फिजिक्स से एमएससी हूं। मैं भी टीचर रहा हूं। हमने भी रिसर्च किया है। लेकिन डॉक्टरिएट की डिग्री नहीं ली है। भारत में अगर कोई रीच भाषा है तो वह संस्कृत है। लेकिन आजकल इसका लोप होता जा रहा है। इसलिए मैंने उत्तर प्रदेश का शिक्षा मंत्री रहते हुए वैदिक मैथिमेटिक्स लागू की थी और एक साथ 36 पुस्तकों को हमारे विद्वानों ने लिखी थी।

दोस्तों, ‘राजनीति’ संस्कृति के दो शब्दों से मिलकर बना है- राज और नीति। ‘नीति’ संस्कृति के ‘नेय’ धातु से बना हुआ है जिसका अर्थ होता है, ‘ले जाना’। यानी सन्मार्ग की ओर ले जाना। ऐसा ‘राज’ जो समाज को सही दिशा की ओर ले जाए, उसे ‘राजनीति’ कहते हैं, लेकिन भारतीय राजनीति इस शब्द को खो चुकी है। आइए हम संकल्प लें कि हम राजनीति में इसका खोया हुआ शब्द और खोया हुआ भाव जब तक वापस नहीं लौटाएंगे, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। और मेरी शुभकामना आप सब के साथ है। इसी सोच के साथ आप बढ़िए। धन्यवाद।

श्री अनुराग ठाकुर जी का BJYM Ambassador Programme में दिया गया भाषण (07/01/14)

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष परम आदरणीय श्री राजनाथ सिंह जी। युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री और पटना से विधायक भाई नितिन नवीन जी, राष्ट्रीय महामंत्री भाई राहुल कोठारी जी, युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाई स्वदेश सिंह जी और सबसे युवा विधायक हर्ष सांघवी जी। सभा में उपस्थित मेरे भाइयों व बहनों तथा मीडिया से आए हुए मेरे प्रिय मित्रों। महान फ्रांसिसि सम्राट नेपोलियन की एक घटना से आज मैं कार्यक्रम की शुरुआत करना चाहूंगा। एक बार नेपोलियन अपना भविष्य जानने के लिए एक ज्योतिष के पास गए और अपना हाथ दिखाने लगे तो ज्योतिष ने कहा कि आपके हाथ की लकीरों में तो भाग्य की रेखा ही नहीं है। यह सुनकर सब स्तब्ध रह गए, लेकिन नेपोलियन ने अपना चाकू निकाला और अपनी हथेली काटते हुए एक निशान बना डाली। और वापस हाथ उस ज्योतिष की ओर रख दिया और पूछा कि अब मेरा भाग्य बताओ। तो ज्योतिष ने जवाब दिया कि मैं एक अदना सा व्यक्ति उस व्यक्ति का भाग्य कैसे बताऊंगा जिसने अपने भाग्य की रेखा खुद बनाई है। आज मैं ऐसे नौजवानों के बीच खड़ा हूं जो न केवल अपना भविष्य बनाने जा रहे हैं, बल्कि पूरे देश का भविष्य बनाने जा रहे हैं। और ऐसे कार्यक्रम की शुरुआत ऐसे सम्माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष के माध्यम से होने जा रही है जो भारतीय जनता पार्टी को नई बुलंदियों पर ले गए। बीजेवाईएम कैंपस एम्बेसडर प्रोग्राम की शुरुआत आज हम करने वाले हैं। आखिर इस कार्यक्रम के माध्यम से हम क्या करना चाहते हैं ? भारत में 80 करोड़ युवा हैं जो भारत की लगभग 70 फीसदी आबादी है। आज के युवा अपना उज्ज्वल भविष्य बनाने और देश को महाशक्ति बनाने की ओर देख रहे हैं। एंड आई बिलिव यूथ बिईंग लारजेस्ट टेक होल्डर हैज टू प्ले ए वेरी इम्पॉरटेंट रोल इन द नेशन बिल्डिंग प्रोसेस.. लेकिन इन युवाओं को किस तरह राष्ट्र निर्माण में लगाया जाए, इसकी कल्पना भारतीय जनता युवा मोर्चा ने की है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से हम देश के 523 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज, 12,000 से ज्यादा कॉलेजेज में पढ़ने वाले सवा दो करोड़ नौजवानों तक पहुंचेंगे। देश में लगभग 43 लाख नौजवान डिसटेंस एजुकेशन प्राप्त कर रहे हैं। लगभग 33 लाख नौजवान डिप्लोमा कोर्सेस कर रहे हैं। और पूरे देश में लगभग एक लाख 20 हजार से ज्यादा फैकल्टी मेबर्स हैं। हम चाहते हैं कि उन तक पहुंचा जाए और एक नई राजनीति की शुरुआत नई सोच, नई उम्मीद, नए लोगों के साथ आज भारतीय जनता युवा मोर्चा करने जा रही है। भाइयों और बहनों, इस कार्यक्रम के माध्यम से हमारा प्रयास होगा कि देशभर के कॉलेजों में पढ़ रहे नौजवानों पर हम पहुंचे और उनको ऑन-लाइन जाकर बीजेवाईएम कैंपस एम्बेसडर के इस फॉर्म को भरना है। उनकी इवेल्युएशन की जाएगी कि उनमें स्पीकिंग स्किल्स या ऑर्गेनाइजेशनल स्किल्स कितनी अच्छी है। किस तरह से वो भारतीय जनता पार्टी को बढ़ावा दे सकते हैं। वे अपने-अपने कॉलेजेज में भारतीय जनता पार्टी के विचारधारा को लेकर वहां के युवाओं को भारतीय जनता पार्टी के साथ जोड़ सकते हैं। और सबसे बड़ा महत्वपूर्ण कि वोटर रजिस्ट्रेशन का और वोट डलवाने का काम करने वाले हैं, क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ा हथियार अगर कुछ है तो वह वोट है और वोट की चोट बहुत गहरी होती है। और आने वाले चुनाव में कांग्रेस को ऐसी वोट की चोट मारेंगे कि हम कांग्रेस-मुक्त भारत का निर्माण कर देंगे। मित्र, इस कैंपस एम्बेसडर प्रोग्राम के माध्यम से हम चाहते हैं कि युवा भारत में अच्छे नेता भी चुनें और आने वाले भारत में जो भविष्य के नेता हों, वो नौजवान एक अच्छे नेता ही न चुनें, भविष्य के नेता भी चुनें। इस कैंपस एम्बेसडर प्रोग्राम के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी भविष्य के नेता भी यहीं से बनाएगी।

ये सब मैं इसलिए कहना चाहता हूं, क्योंकि कांग्रेस के लिए युवा केवल एक वोट बैंक है। फॉर कांग्रेस यूथ इज मीयर वोट बैंक, बट फॉर बीजेपी, दे आर नॉट ऑनली फ्यूचर बट ऑलसो द चेंजमेकर ऑफ टुडे। और मुझे लगता है, अगर हम सोचते हैं कि युवा आज के चेंजमेकर हैं तो नई राजनीति में हमें तीन चीजों पर फोकस करना होगा- शिक्षा, रोजगार और सशक्तिकरण। द की एलिमेंट फॉर द न्यू पॉलिटिक्स विल बी- एजुकेशन, इम्प्लॉयमेंट और एम्पावरवेंट। बीजेवाईएम कैंपस एम्बेसडर प्रोग्राम एम्स टू ब्रिंग टूगेदर डिफेरेंट कॉलेजेज एंड यूनिवर्सिटीज टूगेदर। हमारा फोकस होगा कि एम्पावरमेंट जो यूथ की करनी है, उनके माध्यम से हम जानना चाहते हैं कि देश के युवा चाहते क्या हैं। ये 80 करोड़ नौजवान देश के गांव में, देश के मेट्रोज में टियर-वन, टियर-टू, टियर थ्री सिटीज में रहते हैं। अलग-अलग जाति धर्मों से लोग आते हैं। हर किसी का अपना विचार व महत्वाकांक्षाएं हैं। और इनके विचार जानकर हम चाहते हैं कि भाजपा जब चार महीने के बाद सत्ता में आए तो इस देश की युवा नीति केवल भारतीय जनता पार्टी न बनाए, इन कैंपस एम्बेसडर प्रोग्राम के माध्यम से जो नौजवान कैंपस एम्बेसडर चुने जाएंगे, वो नौजवान देश के करोड़ों युवाओं के विचार जानकर युवा नीति बनाएं। हम ऐसा प्रयास करने वाले हैं कि युवा नीति बने तो देश के युवाओं के माध्यम से बने।

मित्रों, आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी अपने व्यस्ततम समय में से जो आज समय निकाल पाए। हमने जब इनसे अनुरोध किया कि इस कार्यक्रम की शुरुआत करनी है तो उन्होंने कहा कि चाहे जो हो जाए, युवाओं के कार्यक्रम में मुझे जाना है। आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह जी पहले युवा मोर्चा के भी राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। और युवाओं व युवा मोर्चा के प्रति इनका पहले से ही गहरा लगाव है। आज जब भारतीय जनता युवा मोर्चा देश के 523 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज, 12,000 से ज्यादा कॉलेजेज और करोड़ों नौजवानों के पास पहुंचने की बात कर रहा है और मोदी जी को देश का प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश के नौजवान किसी भी स्तर तक आंदोलन और मेहनत करने के लिए तैयार हैं, तो इससे बड़ा हमारे लिए क्या होगा कि इस कार्यक्रम की शुरुआत आदरणीय श्री राजनाथ सिंह जी करने जा रहे हैं। आदरणीय अध्यक्ष जी, जब पहले चरण के लिए 17 जनवरी तक ये कैंपस एम्बेसडर नियुक्त कर लिए जाएंगे, उसके बाद हमारा प्रयास होगा कि 17 जनवरी से लेकर 31 जनवरी तक, पूरे कैंपसेस में वोटर रजिस्ट्रेशन का कार्यक्रम और वोटर रजिस्ट्रेशन अवेयरनेस के कार्यक्रम चले। केवल इतना ही नहीं, वोट फॉर इंडिया कैंपेन की लॉन्च यही है कि हम उसी दिन 17 जनवरी से पूरे देश में वोट फॉर इंडिया कैंपेन लॉन्च करेंगे ताकि देशभर का यह सबसे बड़ा इंडियाज फस्ट एंड लारजेस्ट कैंपस एम्बेसडर प्रोग्राम के साथ-साथ वोटर रजिस्ट्रेशन अवेयरनेस कैंपेन की भी शुरुआत होगी। वोट फॉर इंडिया कैंपेन की भी शुरुआत होगी और ये करोड़ों नौजवान इन कैंपसेस के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी के विचारों से जुड़ेंगे। हमारा प्रयास होगा कि वसंत पंचमी के समय फरवरी के महीने में हम मोदी कैफे के नाम से देश के कॉलेज व यूनिवर्सिटीज में एक ऐसी ड्राइव शुरू करें, जहां पर सेशन कंडक्ट किए जाएं। जहां पर बीजेपी की विचारधारा एनडीए वर्सेज यूपीए, किस तरह से भारतीय जनता पार्टी गुड गवर्नेंस में विश्वास रखती है और आज के नौजवानों के लिए जिस तरह श्री अटल बिहारी वायपेयी जी ने कांग्रेस के 27 लाख के मुकाबले छह करोड़ 25 लाख लोगों को रोजगार दिया था, जो कांग्रेस से 30 गुणा अधिक रोजगार देने का भाजपा ने काम किया था और जब इस बार नरेंद्र मोदी जी आएंगे तो कई करोड़ों लोगों को रोजगार देने का काम होगा।

मित्रों, आज का युवा चाहता है एक अच्छी शिक्षा, अच्छा रोजगार और सशक्तिकरण। मैं आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि भाजपा ने अपने स्व-शासित राज्यों में एक अच्छा प्रशासन दिया है, रोजगार दिया है व युवाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया है। हम प्रयास करेंगे कि एक तरफ जहां बदलाव का दौर देश में चल रहा है, जहां युवा उत्सुक हैं, आक्रोशित हैं, उसको अपने साथ जोड़ें और राष्ट्र-निर्माण में लगाएं। ताकि एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकें कि 2022 में जब भारत आजादी की 76वीं वर्षगांठ में 15 अगस्त को लाल किले पर हमारे देश के प्रधानमंत्री तिरंगा-झंडा फहरा रहे होंगे, तो उस वक्त हम गर्व के साथ कह सकें कि भारत एक डिवेलप्ड इंडिया (विकसित भारत) बन चुका है। ये हमें अचीव करना है अगले 10 वर्षों में और इस देश की पॉलिसीज में सबसे बड़ा योगदान अगर कोई कर सकता है, तो युवा कर सकता है और कॉलेज-यूनिवर्सिटीज में पढ़ने लिखने वाला युवा भारतीय जनता युवा मोर्चा के साथ जुड़कर एक अच्छी सरकार चुनेगा और एक अच्छी सरकार बनाकर हम एक अच्छे भारत का निर्माण करेंगे। और एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जो विश्व-गुरु बन सके। एक बार फिर मैं आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष का इस कार्यक्रम में आने पर सारे भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से और देश के करोड़ों नौजवान जो हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के माध्यम से आज इस कैंपस एम्बेसडर प्रोग्राम से जुड़ने वाले हैं, उनको भी यही कहना चाहता हूं कि आइए इकट्ठे एक ऐसे भारत का निर्माण करें जो विश्व-गुरु बन सके। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। जय भारत, जय भाजपा।